संक्षिप्त उत्तर
कम्प्लीशन सर्टिफ़िकेट और ऑक्यूपेंसी सर्टिफ़िकेट में क्या फ़र्क़ है? कम्प्लीशन सर्टिफ़िकेट बताता है कि इमारत मंज़ूर नक्शे के अनुसार बनी है। ऑक्यूपेंसी सर्टिफ़िकेट प्राधिकरण की वह मंज़ूरी है जिससे इमारत में रहने या उसका इस्तेमाल करने की इजाज़त मिलती है। कुछ जगहों पर एक संयुक्त कम्प्लीशन-कम-ऑक्यूपेंसी सर्टिफ़िकेट दिया जाता है; कहीं आर्किटेक्ट कम्प्लीशन प्रमाणित करता है और प्राधिकरण ऑक्यूपेंसी देता है। दोनों तरह से मकान पूरा होने पर और उसमें रहने से पहले आवेदन करें, और आम तौर पर निरीक्षण की उम्मीद रखें।

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- कम्प्लीशन और ऑक्यूपेंसी सर्टिफ़िकेट में क्या फ़र्क़ है?
- क्या ये एक सर्टिफ़िकेट है या दो?
- अपने मकान के लिए यह सर्टिफ़िकेट कैसे लें?
- आम तौर पर कौन-से दस्तावेज़ लगते हैं?
- इस सर्टिफ़िकेट से क्या प्रभावित होता है?
- क्या आप हिस्सों में सर्टिफ़िकेट ले सकते हैं?
- कौन-सी गलतियाँ न करें?
- अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- संबंधित गाइड
- स्रोत
मकान पूरा होने पर एक और मंज़ूरी लेनी होती है: कम्प्लीशन सर्टिफ़िकेट, ऑक्यूपेंसी सर्टिफ़िकेट, या एक ही सर्टिफ़िकेट जो दोनों का काम करता है। बैंक, बिजली और पानी के बोर्ड और भविष्य के खरीदार इसे माँग सकते हैं। यह पेज बताता है कि हर सर्टिफ़िकेट का मतलब क्या है, शहर-शहर में नाम अलग क्यों हैं, आवेदन में आम तौर पर क्या लगता है, निरीक्षण में क्या देखा जाता है, और इस सर्टिफ़िकेट का किस पर असर पड़ता है। इसमें कोई फीस या समय-सीमा नहीं दी गई है, क्योंकि हर प्राधिकरण अपनी तय करता है। यह सामान्य जानकारी है, कानूनी सलाह नहीं।
कम्प्लीशन और ऑक्यूपेंसी सर्टिफ़िकेट में क्या फ़र्क़ है?
राष्ट्रीय रियल एस्टेट कानून, RERA Act 2016, दोनों शब्दों को परिभाषित करता है, और विवरण स्थानीय कानूनों पर छोड़ता है:
- एक कम्प्लीशन सर्टिफ़िकेट प्रमाणित करता है कि इमारत “स्वीकृत नक्शे, लेआउट प्लान और विनिर्देशों के अनुसार विकसित की गई है”।
- एक ऑक्यूपेंसी सर्टिफ़िकेट वह सर्टिफ़िकेट है जो “किसी भी इमारत में रहने की अनुमति देता है”, और जिसमें पानी, साफ़-सफ़ाई और बिजली जैसी नागरिक सुविधाओं का प्रावधान हो।
दोनों परिभाषाओं में लिखा है “या ऐसा कोई अन्य सर्टिफ़िकेट, चाहे उसका जो भी नाम हो”, क्योंकि हर राज्य इन्हें अलग नाम से बुलाता है।
सरल शब्दों में: कम्प्लीशन सर्टिफ़िकेट बताता है कि मकान मंज़ूर नक्शे से मेल खाता है; ऑक्यूपेंसी सर्टिफ़िकेट बताता है कि आप उसमें रह सकते हैं या उसका उपयोग कर सकते हैं।
क्या ये एक सर्टिफ़िकेट है या दो?
यह इस पर निर्भर करता है कि आप कहाँ बना रहे हैं:
| जगह | कैसे काम करता है |
|---|---|
| Model Building Bye-Laws 2016 (MoHUA) | एक दस्तावेज़: प्राधिकरण “कम्प्लीशन-कम-ऑक्यूपेंसी सर्टिफ़िकेट” जारी करता है |
| दिल्ली (UBBL 2016) | एक दस्तावेज़: ऑक्यूपेंसी-कम-कम्प्लीशन सर्टिफ़िकेट (OCC) |
| महाराष्ट्र (UDCPR 2020, मुंबई और कुछ अन्य इलाकों के बाहर) | दो चरण: आपका आर्किटेक्ट या लाइसेंसी इंजीनियर प्राधिकरण को इमारत का कम्प्लीशन सर्टिफ़िकेट देता है; प्राधिकरण निरीक्षण करता है और ऑक्यूपेंसी सर्टिफ़िकेट जारी करता है |
| तमिलनाडु (TNCDBR 2019) | प्राधिकरण सेवा कनेक्शन से पहले कम्प्लीशन सर्टिफ़िकेट जारी करता है; कुछ छोटी आवासीय इमारतें इस नियम से बाहर हैं |
RERA खुद कहता है कि प्रमोटर को “कम्प्लीशन सर्टिफ़िकेट या ऑक्यूपेंसी सर्टिफ़िकेट, या दोनों, जैसा लागू हो” लेना ज़रूरी है। कौन-सा सर्टिफ़िकेट जारी होता है, यह अपने स्थानीय प्राधिकरण से पूछें। RERA की ज़िम्मेदारियाँ उन प्रमोटरों पर लागू होती हैं जो बेचने के लिए इमारत बनाते हैं, न कि उस मालिक पर जो अपने इस्तेमाल के लिए मकान बना रहा है; आपका अपना मकान आपके स्थानीय बिल्डिंग नियमों के अंतर्गत आता है।
अपने मकान के लिए यह सर्टिफ़िकेट कैसे लें?
ब्योरा अलग-अलग होता है, लेकिन मॉडल बायलॉज़, दिल्ली और महाराष्ट्र के नियमों के तहत आम तौर पर ये चरण होते हैं:
- मकान को मंज़ूर नक्शे के अनुसार पूरा करें। नक्शे से कोई भी बदलाव बनने से पहले मंज़ूर हो जाना चाहिए। दिल्ली के नियम न्यूनतम काम की सूची देते हैं, जैसे फ़र्श, बिजली की वायरिंग, कम से कम एक शौचालय में और रसोई में प्लंबिंग, और ऐसी इमारत जिसे ताला लगाकर बंद किया जा सके; सर्टिफ़िकेट के लिए अंदरूनी या बाहरी फ़िनिशिंग और प्लास्टर ज़रूरी नहीं हैं।
- आपका आर्किटेक्ट या इंजीनियर कम्प्लीशन की सूचना दर्ज करता है, आम तौर पर ऑनलाइन, प्राधिकरण द्वारा माँगे गए दस्तावेज़ों के साथ।
- प्राधिकरण, या कुछ छोटे मकानों के लिए आपका अपना पेशेवर, मकान का निरीक्षण करता है मंज़ूर नक्शे के मुकाबले।
- सर्टिफ़िकेट जारी होता है, या कारणों सहित आपत्तियाँ दी जाती हैं। आप आपत्तियाँ ठीक करते हैं और फिर से आवेदन करते हैं।

आम तौर पर कौन-से दस्तावेज़ लगते हैं?
मॉडल बायलॉज़, दिल्ली के बायलॉज़ और महाराष्ट्र के नियमों में ये बार-बार आते हैं:
| दस्तावेज़ | नोट |
|---|---|
| कम्प्लीशन की सूचना या आवेदन | उस आर्किटेक्ट या इंजीनियर के ज़रिए दर्ज होता है जिसने काम की निगरानी की |
| As-built या कम्प्लीशन ड्रॉइंग | असल में बनाए गए नक्शे, सिर्फ़ मंज़ूर किए गए नहीं |
| स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी सर्टिफ़िकेट | स्ट्रक्चरल इंजीनियर के हस्ताक्षर वाला, जहाँ आपका प्राधिकरण इसे माँगता है |
| इमारत की तस्वीरें | अलग-अलग तरफ़ से |
| निरीक्षण रिपोर्ट | प्राधिकरण की निरीक्षण रिपोर्टों की प्रतियाँ |
| NOC (आग, लिफ़्ट और अन्य) | सिर्फ़ वहाँ जहाँ आपकी इमारत को इनकी ज़रूरत हो; मॉडल बायलॉज़ ग्रुप हाउसिंग के अलावा आवासीय प्रस्तावों को ऑक्यूपेंसी के लिए आग से जुड़ी मंज़ूरी (फ़ायर क्लियरेंस) से छूट देते हैं |
फ़ास्ट-ट्रैक रास्तों पर छोटे मकानों को सिर्फ़ कम्प्लीशन की सूचना की ज़रूरत पड़ सकती है। उदाहरण के लिए, दिल्ली की SARAL योजना मालिक को, आर्किटेक्ट या इंजीनियर के हस्ताक्षर वाले नक्शों के साथ कम्प्लीशन की सूचना दर्ज करने के बाद ऑक्यूपेंसी शुरू करने देती है, और महाराष्ट्र का लो-रिस्क रास्ता मालिक से प्राधिकरण को कब्ज़े (ऑक्यूपेशन) की सूचना देने को कहता है।
इस सर्टिफ़िकेट से क्या प्रभावित होता है?
- मकान में रहना। दिल्ली के बायलॉज़ कहते हैं कि OCC मिलने तक किसी भी व्यक्ति को इमारत में रहने की इजाज़त नहीं होगी, और महाराष्ट्र के कमेंसमेंट सर्टिफ़िकेट में भी इसी तरह की शर्त है। अपने प्राधिकरण का नियम जाँच लें।
- पानी, सीवर और बिजली। मॉडल बायलॉज़ कहते हैं कि कम्प्लीशन/ऑक्यूपेंसी सर्टिफ़िकेट के बिना नगरपालिका की पानी की मेन लाइन या सीवर से कोई कनेक्शन नहीं दिया जाना चाहिए, और बिना इसके अस्थायी निर्माण कनेक्शन जारी नहीं रहने चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2024 में निर्देश दिया कि बिजली, पानी और सीवरेज के कनेक्शन तभी दिए जाएँ जब कम्प्लीशन/ऑक्यूपेशन सर्टिफ़िकेट पेश किया जाए। कुछ राज्यों के नियम कुछ छोटे मकानों को छूट देते हैं; उदाहरण के लिए, तमिलनाडु के नियम कुछ छोटी आवासीय इमारतों को कम्प्लीशन-सर्टिफ़िकेट वाले नियम से बाहर रखते हैं। अपने राज्य का मौजूदा नियम जाँच लें।
- होम लोन। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि बैंक और वित्तीय संस्थान किसी इमारत पर कर्ज़ तभी दें जब उसका कम्प्लीशन/ऑक्यूपेशन सर्टिफ़िकेट जाँच लिया गया हो।
- विचलन। कोर्ट ने निर्देश दिया कि सर्टिफ़िकेट निरीक्षण के बाद जारी हो, और मंज़ूर नक्शे से किसी भी विचलन के पूरी तरह ठीक होने तक इसे टालने का निर्देश दिया। इसलिए बिना मंज़ूरी बना अतिरिक्त कमरा या मंज़िल सर्टिफ़िकेट को रोक सकता है।
अगर निर्माण के दौरान बदलाव की ज़रूरत हो, तो बनाने से पहले संशोधित नक्शा मंज़ूर करवा लें।
क्या आप हिस्सों में सर्टिफ़िकेट ले सकते हैं?
कभी-कभी। मॉडल बायलॉज़ किसी स्वतंत्र ब्लॉक के लिए आंशिक कम्प्लीशन या ऑक्यूपेंसी सर्टिफ़िकेट की अनुमति देते हैं, और कहते हैं कि आवासीय मकान के लिए यह एक स्वतंत्र मंज़िल के लिए जारी हो सकता है। महाराष्ट्र के नियम भी शर्तों के साथ आंशिक ऑक्यूपेंसी सर्टिफ़िकेट की अनुमति देते हैं। आपका प्राधिकरण ऐसा करता है या नहीं, यह उसके नियमों पर निर्भर है।
कौन-सी गलतियाँ न करें?
ये ऊपर बताए नियमों और साइट पर आम चलन से निकलती हैं:
- सर्टिफ़िकेट या आपके रास्ते के लिए ज़रूरी कम्प्लीशन की सूचना मिलने से पहले मकान में रहने चले जाना।
- मंज़ूर नक्शे में न होने वाली कोई चीज़ बनाना, और फिर पता चलना कि वह सर्टिफ़िकेट को रोक रही है।
- मंज़ूर नक्शा, असल ड्रॉइंग, कम्प्लीशन की सूचना और सर्टिफ़िकेट खुद खो देना। इन्हें दोबारा बिक्री, लोन और भविष्य के विस्तार के लिए एक साथ संभालकर रखें।
- सर्टिफ़िकेट देखे बिना रीसेल मकान खरीदना, या यह जाँचे बिना कि वह असल में बनी हर मंज़िल को कवर करता है (आम चलन)।
- यह मान लेना कि किसी और राज्य की छूट आप पर लागू होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या स्वतंत्र मकान के लिए ऑक्यूपेंसी सर्टिफ़िकेट चाहिए?
कई जगहों पर, हाँ। मॉडल बायलॉज़ और दिल्ली के बायलॉज़ इमारत में रहने से पहले सर्टिफ़िकेट ज़रूरी बनाते हैं, और सुप्रीम कोर्ट ने इसे यूटिलिटी कनेक्शन और लोन से जोड़ा है। कुछ राज्य कुछ छोटे मकानों को छूट देते हैं (जैसे तमिलनाडु) या सर्टिफ़िकेट की जगह सूचना (intimation) से काम चलाते हैं (दिल्ली की SARAL योजना, महाराष्ट्र का लो-रिस्क रास्ता)। अपने स्थानीय प्राधिकरण से पूछें।
कम्प्लीशन और ऑक्यूपेंसी सर्टिफ़िकेट में पहले कौन आता है?
जहाँ ये अलग-अलग हैं, जैसे महाराष्ट्र में, वहाँ पहले आपके आर्किटेक्ट या इंजीनियर से मिला कम्प्लीशन सर्टिफ़िकेट आता है, और फिर प्राधिकरण ऑक्यूपेंसी सर्टिफ़िकेट जारी करता है। जहाँ एक ही संयुक्त सर्टिफ़िकेट है, जैसे दिल्ली में, वहाँ आपको दोनों एक साथ मिलते हैं।
क्या आप ऑक्यूपेंसी सर्टिफ़िकेट के बिना बिजली कनेक्शन ले सकते हैं?
सुप्रीम कोर्ट ने 2024 में निर्देश दिया कि सेवा कनेक्शन तभी दिए जाएँ जब कम्प्लीशन/ऑक्यूपेशन सर्टिफ़िकेट हो। कुछ राज्यों के नियम, जैसे तमिलनाडु का, कुछ छोटे मकानों को छूट देते हैं। अपने बिजली बोर्ड और स्थानीय प्राधिकरण से जाँच लें।
क्या आप ऑक्यूपेंसी सर्टिफ़िकेट के बिना होम लोन ले सकते हैं?
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि बैंक और वित्तीय संस्थान किसी इमारत पर कर्ज़ तभी दें जब उसका कम्प्लीशन/ऑक्यूपेशन सर्टिफ़िकेट जाँच लिया गया हो। आपके बैंक को क्या चाहिए, यह उससे पूछें।
कम्प्लीशन सर्टिफ़िकेट कौन जारी करता है?
आपका स्थानीय प्राधिकरण, जैसे वह नगर निगम या विकास प्राधिकरण जिसने नक्शा मंज़ूर किया था। कुछ व्यवस्थाओं में, जैसे महाराष्ट्र की, आपका आर्किटेक्ट या इंजीनियर कम्प्लीशन सर्टिफ़िकेट देता है और प्राधिकरण ऑक्यूपेंसी सर्टिफ़िकेट जारी करता है।
संबंधित गाइड
यह गाइड सामान्य जानकारी है, कानूनी सलाह नहीं। डिस्क्लेमर (अंग्रेज़ी) पढ़ें। कौन-सा सर्टिफ़िकेट चाहिए, यह आपके स्थानीय प्राधिकरण के नियम तय करते हैं, और आपका आर्किटेक्ट या इंजीनियर और ज़रूरत पड़ने पर वकील आपके मकान पर सलाह दे सकते हैं।
स्रोत
- The Real Estate (Regulation and Development) Act, 2016, sections 2(q), 2(zf), 2(zk) and 11(4)(b). Gazette copy hosted by the Tripura Urban Development Department.
- Ministry of Housing and Urban Affairs (then MoUD), Model Building Bye-Laws 2016: clauses 2.16 to 2.19 and Appendix A-14 (Completion-cum-Occupancy Certificate). A model for states, not a law in itself.
- Unified Building Bye-Laws for Delhi 2016, compendium with amendments (DDA): clauses 2.6 and 2.7, SARAL scheme, Form D-1.
- Maharashtra Unified Development Control and Promotion Regulations (UDCPR) 2020: regulations 2.9 to 2.11, the low-risk appendix and the commencement certificate form (copy hosted by GRIHA; check for later amendments).
- Tamil Nadu Combined Development and Building Rules, 2019, rule 20 (DTCP extract, 2019; check for later amendments).
- Supreme Court of India, Rajendra Kumar Barjatya v. U.P. Avas Evam Vikas Parishad, 2024 INSC 990, paragraph 21. Full text as published by Indian Kanoon.
यह केवल सामान्य जानकारी है। यह स्ट्रक्चरल डिज़ाइन या पेशेवर सलाह नहीं है। अपने नक्शे और साइट की जाँच किसी लाइसेंसधारी स्ट्रक्चरल इंजीनियर या आर्किटेक्ट से कराएँ।
