संक्षिप्त उत्तर
घर का नक्शा पास कैसे कराएं? घर का नक्शा पास कराने के लिए निर्माण से पहले स्थानीय प्राधिकरण (नगर निगम, विकास प्राधिकरण या पंचायत) में आवेदन करें। एक रजिस्टर्ड आर्किटेक्ट या इंजीनियर नक्शे बनाकर उन पर हस्ताक्षर करता है और आम तौर पर उन्हें मालिकाना कागज़ात के साथ ऑनलाइन जमा करता है। प्राधिकरण नक्शे को मंज़ूरी देता है, बदलाव के साथ मंज़ूरी देता है, या कारण बताकर मना करता है। नियम, दस्तावेज़, फीस और समय-सीमा राज्य और शहर के अनुसार अलग होते हैं, इसलिए अपने प्राधिकरण की सूची देखें।

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घर बनाने से पहले, उसे बढ़ाने से पहले या दोबारा बनाने से पहले आपको स्थानीय प्राधिकरण से अनुमति लेनी होती है। इसे लोग नक्शा पास (plan sanction), बिल्डिंग परमिट, मैप अप्रूवल या बिल्डिंग लाइसेंस भी कहते हैं। इस पेज पर इसके पीछे का आम ढाँचा समझाया गया है: कौन मंज़ूरी देता है, आम चरण, ज़्यादातर प्राधिकरण कौन-से दस्तावेज़ माँगते हैं, छोटे घरों के लिए तेज़ रास्ते, और अगर घर मंज़ूर नक्शे से अलग बना तो क्या होता है। इसमें कोई फीस, समय-सीमा या प्लॉट के आकार की सीमा नहीं दी गई है, क्योंकि हर राज्य और शहर अपनी सीमा खुद तय करता है। इसे तैयारी के लिए इस्तेमाल करें, फिर अपने प्राधिकरण की चेकलिस्ट के अनुसार चलें।
नक्शा पास कौन करता है?
आपका स्थानीय प्राधिकरण: नगर निगम या नगर परिषद, कोई विकास प्राधिकरण (जैसे दिल्ली में DDA), या गाँव में ग्राम पंचायत। यह राज्य के बिल्डिंग बायलॉज़ या नियमों के तहत होता है। जिस इलाके को किसी विकास प्राधिकरण के लिए अधिसूचित किया गया है, वहाँ गाँव में भी वही प्राधिकरण मंज़ूरी देने वाला हो सकता है। अपने स्थानीय दफ़्तर से पूछें कि आपके प्लॉट को कौन-सी संस्था कवर करती है।
पूरे देश के लिए एक ही नियम-पुस्तिका नहीं है। आवास और शहरी कार्य मंत्रालय ने राज्यों के अपनाने के लिए एक मॉडल के रूप में Model Building Bye-Laws 2016 जारी किए थे। 2026 के National Building Construction Standards साफ़ कहते हैं कि ज़मीन और इमारतों का नियमन राज्य का विषय है, और परमिट की प्रक्रिया, FAR, डेवलपमेंट कंट्रोल नियम और पार्किंग के मानक राज्य और स्थानीय सरकारों पर छोड़ते हैं।
मॉडल बायलॉज़ का बुनियादी नियम साफ़ है: प्राधिकरण से पहले बिल्डिंग परमिट लिए बिना किसी को भी इमारत बनाना, दोबारा बनाना या उसमें जोड़ या बदलाव नहीं करना चाहिए। प्लास्टर, छोटी मरम्मत, री-रूफ़िंग, री-फ़्लोरिंग, सफ़ेदी, पेंटिंग और अंदर के पार्टीशन जैसे काम मॉडल बायलॉज़ के तहत आम तौर पर परमिट के बिना होते हैं, पर अपने स्थानीय नियम जाँच लें।
नक्शा पास कराने के लिए मंज़ूरी के चरण क्या हैं?
ब्योरा अलग-अलग होता है, पर ज़्यादातर व्यवस्थाएँ इस क्रम में चलती हैं:
- ज़मीन की जाँच करें। पक्का कर लें कि ज़मीन का टाइटल साफ़ है, ज़मीन के उपयोग में घर बनाने की अनुमति है, और अगर प्लॉट किसी लेआउट में है तो वह लेआउट मंज़ूर है। बिल्डिंग की मंज़ूरी इन सबके बाद आती है।
- रजिस्टर्ड आर्किटेक्ट या इंजीनियर रखें। मॉडल बायलॉज़ कहते हैं कि नक्शों पर मालिक और किसी रजिस्टर्ड आर्किटेक्ट या इंजीनियर, दोनों के हस्ताक्षर माँगे जाते हैं। ज़्यादातर राज्य की व्यवस्थाओं में ऐसे ही किसी पेशेवर के ज़रिए आवेदन जमा होता है।
- आवेदन करें, आम तौर पर ऑनलाइन। MoHUA की रिपोर्ट के अनुसार Online Building Permission System हज़ारों कस्बों में चल रहा है, और ऐसे पोर्टल (जैसे तेलंगाना का) आपको आवेदन की स्थिति देखने देते हैं।
- स्क्रूटनी (scrutiny)। प्राधिकरण नक्शों को अपने बायलॉज़ से मिलाकर जाँचता है, अक्सर ऐसे सॉफ़्टवेयर से जो ड्रॉइंग पढ़ता है। वह आपत्तियाँ उठा सकता है; तब आप नक्शों में सुधार करके उन्हें दोबारा जमा करते हैं।
- फ़ैसला। प्राधिकरण नक्शे को मंज़ूरी देता है, बदलाव के साथ मंज़ूरी देता है, या मना करता है। मना करने पर कारण बताए जाने चाहिए।
- प्राधिकरण जो फीस माँगे, वह जमा करें। हर प्राधिकरण अपनी फीस खुद तय करता है।
- पास हुए नक्शे के हिसाब से बनाएं, और परमिट व पास हुई ड्रॉइंग की एक कॉपी साइट पर रखें। कुछ प्राधिकरण काम शुरू होने पर नोटिस माँगते हैं, और कई प्लिंथ लेवल पर नोटिस या निरीक्षण माँगते हैं।
- घर पूरा होने पर, रहने जाने से पहले, कम्प्लीशन या ऑक्यूपेंसी सर्टिफ़िकेट के लिए आवेदन करें (या प्राधिकरण जो कम्प्लीशन की सूचना माँगे, वह जमा करें)। छोटे घरों के कुछ तेज़ रास्तों में केवल सूचना चाहिए होती है, इसलिए देख लें कि आपके रास्ते में क्या माँगा गया है।
परमिट केवल सीमित अवधि के लिए वैध होता है। अगर काम समय पर पूरा नहीं होता, तो परमिट की समय-सीमा खत्म होने से पहले उसे दोबारा वैध करवाना ज़रूरी है।

नक्शा पास के लिए कौन-से दस्तावेज़ माँगे जाते हैं?
हमने मॉडल बायलॉज़, दिल्ली, महाराष्ट्र, तेलंगाना और तमिलनाडु के आधिकारिक नियम या चेकलिस्ट, और बेंगलुरु के परमिट पोर्टल को पढ़ा। ये चीज़ें बार-बार सामने आईं:
| दस्तावेज़ | कितना आम | नोट्स |
|---|---|---|
| मालिकाना हक़ का सबूत (सेल डीड, लीज़ डीड या ऐसा ही कागज़) | हमारी पढ़ी हर व्यवस्था में | कुछ राज्य पिछली (लिंक) डीड भी माँगते हैं |
| रजिस्टर्ड आर्किटेक्ट या इंजीनियर के हस्ताक्षर वाले नक्शे | लगभग हर व्यवस्था में | अक्सर CAD फ़ाइलों के रूप में, ताकि ऑटोमैटिक जाँच हो सके |
| साइट प्लान, लोकेशन प्लान या साइट की फ़ोटो | हर व्यवस्था में | |
| मालिक के नाम पर ज़मीन या नगर निगम का रिकॉर्ड | अक्सर | अलग-अलग नामों से जाना जाता है: प्रॉपर्टी कार्ड या 7/12 एक्सट्रैक्ट (महाराष्ट्र), खाता या ई-खाता (बेंगलुरु), पट्टा (तमिलनाडु) |
| मंज़ूर लेआउट या सब-डिविज़न का दस्तावेज़ | जहाँ प्लॉट किसी लेआउट में है | |
| प्रॉपर्टी टैक्स की रसीद | कुछ व्यवस्थाओं में | |
| पेशेवरों के प्रमाण पत्र (नियुक्ति, निगरानी, स्ट्रक्चरल सुरक्षा) | अक्सर | कुछ व्यवस्थाओं में ज़रूरी है, और दूसरों में केवल कुछ इमारतों के लिए |
| मालिक का वचन-पत्र या स्व-घोषणा | अक्सर; तेज़ रास्तों पर हमेशा | अक्सर दायित्व स्वीकार करने के साथ |
| अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC; एयरपोर्ट, फ़ायर, हेरिटेज, रेलवे और अन्य) | केवल जहाँ आपकी साइट या इमारत को इनकी ज़रूरत हो | आपके प्राधिकरण की व्यवस्था बताती है कि कौन-से लागू हैं |
उदाहरण के लिए, बेंगलुरु का पोर्टल कहता है कि 1 जुलाई 2025 से बिल्डिंग लाइसेंस के आवेदनों के लिए ई-खाता अनिवार्य है। ऐसे नियम बदलते रहते हैं, इसलिए शुरू करने से पहले अपने प्राधिकरण की वेबसाइट से मौजूदा चेकलिस्ट डाउनलोड कर लें।
स्वयं-प्रमाणन (सेल्फ-सर्टिफिकेशन) क्या है?
हमारी पढ़ी व्यवस्थाओं में से चार में छोटे और सीधे-सादे घरों के लिए एक तेज़ रास्ता है, जिनके नाम अलग-अलग हैं: दिल्ली का SARAL, महाराष्ट्र का लो-रिस्क रास्ता (UDCPR का Appendix K), तेलंगाना की इंस्टेंट मंज़ूरी और तमिलनाडु का सेल्फ-सर्टिफिकेशन। कोई रजिस्टर्ड पेशेवर या मालिक प्रमाणित करता है कि नक्शे नियमों का पालन करते हैं। कुछ में (जैसे दिल्ली के SARAL और महाराष्ट्र के लो-रिस्क रास्ते में), दस्तावेज़ और फीस के साथ आवेदन जमा करना ही अनुमति मानी जाती है।
सेल्फ-सर्टिफिकेशन का मतलब “कोई मंज़ूरी नहीं” नहीं है। नियम फिर भी लागू होते हैं, प्राधिकरण बाद में भी जाँच कर सकता है, और घोषणाओं का दायित्व बनता है। उदाहरण के लिए, तेलंगाना के BuildNow FAQ कहता है कि सेल्फ-सर्टिफिकेशन व्यवस्था में गलत बयान देकर ली गई अनुमति रद्द कर दी जाएगी, और इमारत बिना नोटिस के गिराई जा सकती है। पात्रता प्लॉट के आकार, ऊँचाई, जगह और इस पर निर्भर करती है कि कोई NOC चाहिए या नहीं, इसलिए अपने प्राधिकरण की शर्तें जाँच लें।
पास हुए नक्शे से अलग घर बनाया तो क्या होता है?
पास हुआ नक्शा एक सीमा है, सुझाव नहीं। दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी के दिशा-निर्देश कहते हैं कि निर्माण “केवल पास हुए नक्शे के अनुसार ही किया जाएगा और पहले मंज़ूरी लिए बिना बायलॉज़ से कोई भी विचलन अनुमत नहीं होगा”, कि बायलॉज़ के खिलाफ़ विचलन “गिराए जाने योग्य” हैं, और यह कि अगर ज़रूरी तथ्य छिपाए गए या गलत तरीके से पेश किए गए, तो मंज़ूरी रद्द (void) है।
दिसंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने बिना मंज़ूरी के निर्माण पर निर्देश दिए (Rajendra Kumar Barjatya v. U.P. Avas Evam Vikas Parishad)। इनमें ये शामिल हैं: निर्माण के दौरान पास हुआ नक्शा साइट पर दिखाया जाना चाहिए; कम्प्लीशन या ऑक्यूपेंसी सर्टिफ़िकेट केवल तभी दिए जाने चाहिए जब निरीक्षण में कोई विचलन न मिले; बिजली, पानी और सीवरेज के कनेक्शन केवल उस सर्टिफ़िकेट के बाद दिए जाने चाहिए; और बैंकों को इमारत पर कर्ज़ देने से पहले इसे जाँचना चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि समय बीतने या पैसा खर्च होने से बिना मंज़ूरी की इमारत जायज़ नहीं ठहराई जा सकती।
तो साइट पर किया गया कोई भी बदलाव, जैसे एक अतिरिक्त कमरा या मंज़िल, आपका कम्प्लीशन सर्टिफ़िकेट, बिजली, पानी और सीवरेज के कनेक्शन और आपका लोन, तीनों को रोक सकता है। अगर बदलाव की ज़रूरत हो, तो पहले संशोधित नक्शे की मंज़ूरी ले लें।
नक्शा पास कराते समय कौन-सी गलतियाँ न करें?
ये ऊपर दिए आधिकारिक स्रोतों से और साइट के अनुभव से हैं:
- मंज़ूरी मिलने से पहले काम शुरू कर देना।
- पास हुए नक्शे में न होने वाली अतिरिक्त मंज़िल या कमरा बनाना।
- बिना मंज़ूरी वाले लेआउट में प्लॉट खरीदना और मान लेना कि घर बाद में पास हो सकता है।
- दलाल या पंचायत के “NOC” पर भरोसा करना, मानो वही नक्शा पास हो। मंज़ूरी देने वाले प्राधिकरण से खुद पूछें।
- परमिट को दोबारा वैध करवाए बिना उसकी अवधि खत्म होने देना।
- कम्प्लीशन या ऑक्यूपेंसी सर्टिफ़िकेट से पहले, या आपके रास्ते में जो कम्प्लीशन सूचना माँगी गई है उससे पहले, रहने चले जाना।
- सेल्फ-सर्टिफिकेशन फ़ॉर्म पर गलत जानकारी भरना।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
नक्शा पास के लिए कौन-से दस्तावेज़ चाहिए?
आम तौर पर मालिकाना हक़ का सबूत, रजिस्टर्ड आर्किटेक्ट या इंजीनियर के हस्ताक्षर वाले नक्शे, साइट प्लान, ज़मीन या नगर निगम का रिकॉर्ड, और जहाँ साइट को ज़रूरत हो वहाँ NOC चाहिए। हर प्राधिकरण अपनी सूची खुद प्रकाशित करता है।
क्या निर्माण के बाद नक्शा पास हो सकता है?
कुछ राज्य कुछ विचलनों को सीमित समय के लिए नियमित करने की योजनाएँ चलाते हैं, पर वे शर्तों वाले अपवाद हैं, सामान्य रास्ता नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि समय बीतने या पैसा खर्च होने से बिना मंज़ूरी की इमारत जायज़ नहीं ठहराई जा सकती। निर्माण से पहले मंज़ूरी लें।
क्या ग्राम पंचायत नक्शा पास कर सकती है?
कई राज्यों में ग्राम पंचायत अपने क्षेत्र में राज्य के पंचायत नियमों के तहत बिल्डिंग परमिट देती है। जहाँ कोई विकास प्राधिकरण क्षेत्र को कवर करता है, वहाँ वह प्राधिकरण इसकी जगह मंज़ूरी दे सकता है। अपने स्थानीय दफ़्तर से पूछें।
नक्शा पास की मंज़ूरी कितने समय तक वैध रहती है?
हर प्राधिकरण अवधि तय करता है, और अगर काम पूरा नहीं होता तो परमिट की समय-सीमा खत्म होने से पहले उसे दोबारा वैध करवाना ज़रूरी है। आपके मंज़ूरी पत्र में अवधि लिखी होती है।
नक्शा पास का स्टेटस ऑनलाइन कैसे देखें?
ज़्यादातर राज्य और शहर, जिनके पास ऑनलाइन सिस्टम हैं, आवेदन संख्या से पोर्टल पर आवेदन को ट्रैक करने देते हैं। आपका आर्किटेक्ट या इंजीनियर आपको यह तरीका दिखा सकता है।
छोटे घर के लिए भी नक्शा पास चाहिए?
ज़्यादातर जगहों पर हाँ, पर कई शहरों में छोटे घरों के लिए सरल सेल्फ-सर्टिफिकेशन या इंस्टेंट रास्ता होता है। अपने प्राधिकरण की शर्तें जाँच लें।
संबंधित गाइड
- भारत में घर के निर्माण के चरण: चेकलिस्ट और निरीक्षण के बिंदु
- भारत में ज़मीन के क्षेत्रफल की इकाइयाँ: cent, guntha, gaj, marla, kanal, acre
- घर बनाने से पहले मिट्टी की जाँच: यह क्या है और क्यों ज़रूरी है
- घर के लिए कम्प्लीशन सर्टिफ़िकेट बनाम ऑक्यूपेंसी सर्टिफ़िकेट
यह गाइड सामान्य जानकारी है, कानूनी सलाह नहीं। डिस्क्लेमर (अंग्रेज़ी) पढ़ें। आपके स्थानीय प्राधिकरण के नियम तय करते हैं कि आपको क्या चाहिए, और आपका आर्किटेक्ट या इंजीनियर, और ज़रूरत हो तो कोई वकील, आपके प्लॉट के बारे में सलाह दे सकते हैं।
स्रोत
- Ministry of Housing and Urban Affairs (then MoUD), Model Building Bye-Laws 2016 (TCPO). Chapter 2 (building permit) and Chapter 13 (streamlining approvals). A model for states, not a law in itself.
- SP 7:2026, National Building Construction Standards 2026, Foreword (administrative provisions left to states and local bodies; read from an unofficial copy). It replaced the National Building Code 2016 on 30 April 2026.
- MoHUA Annual Report 2024-25, para 5.13 (Online Building Permission System).
- Supreme Court of India, Rajendra Kumar Barjatya v. U.P. Avas Evam Vikas Parishad, 2024 INSC 990, decided 17 December 2024, paragraphs 19 to 21 (directions on unauthorised construction). Full text as published by Indian Kanoon.
- Delhi Development Authority, Frequently asked questions on building permits.
- Unified Building Bye-Laws for Delhi 2016, compendium with amendments (DDA).
- Maharashtra Unified Development Control and Promotion Regulations (UDCPR) 2020, clause 2.2 and Appendix K (copy hosted by GRIHA).
- Telangana BuildNow checklist and TG-bPASS frequently asked questions.
- Greater Bengaluru Authority, Building Plan Approval System portal (e-Khata notice).
- Tamil Nadu Single Window Portal for planning permission: documents needed.
यह केवल सामान्य जानकारी है। यह स्ट्रक्चरल डिज़ाइन या पेशेवर सलाह नहीं है। अपने नक्शे और साइट की जाँच किसी लाइसेंसधारी स्ट्रक्चरल इंजीनियर या आर्किटेक्ट से कराएँ।
