संक्षिप्त उत्तर

भारत में मकान बनाने के स्टेज कौन-कौन से हैं? मकान स्टेज में बनता है: मंज़ूरी, साइट की मार्किंग, खुदाई और नींव, प्लिंथ, कॉलम, दीवारें और छत की स्लैब, सर्विस (बिजली-पानी), प्लास्टर, वॉटरप्रूफिंग, फ़र्श, दरवाज़े-खिड़कियाँ, पेंट और हैंडओवर। हर स्टेज पिछले स्टेज को ढक देता है, इसलिए उससे पहले आपके इंजीनियर को जाँच करनी चाहिए, क्योंकि कंक्रीट या प्लास्टर के नीचे छिपी गलती ठीक करना सबसे महँगा पड़ता है।

पास-पास के तीन मकान के प्लॉट, नींव से लेकर लगभग पूरे बने मकान तक, निर्माण के अलग-अलग स्टेज पर
एआई से बना चित्र: निर्माण के अलग-अलग स्टेज पर तीन मकान के प्लॉट।
इस पेज पर (11)
  1. मकान बनाने के स्टेज कौन-कौन से हैं?
  2. हर स्टेज पर क्या जाँचें?
  3. काम शुरू करने से पहले क्या तैयार होना चाहिए?
  4. नींव और प्लिंथ में क्या जाँचें?
  5. कंक्रीट में क्या जाँचें?
  6. प्लास्टर से पहले क्या जाँचें?
  7. छत और गीली जगहों पर क्या जाँचें?
  8. आख़िर में क्या होता है?
  9. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
  10. संबंधित गाइड
  11. स्रोत

मकान एक तय क्रम में बनता है, और हर स्टेज अपने से पिछले स्टेज को ढक देता है। कंक्रीट (concrete) सरिया (TMT bar) को ढकता है, प्लास्टर पाइपों को ढकता है, और फ़र्श मिट्टी को ढकता है। इसीलिए सही समय पर की गई एक जाँच, आख़िर में की गई लंबी जाँच से ज़्यादा काम की है। यह पेज स्टेज क्रम से बताता है, अगले स्टेज पर जाने से पहले क्या जाँचें, और आगे कहाँ पढ़ें।

मकान बनाने के स्टेज कौन-कौन से हैं?

  1. नक्शा, मंज़ूरी और ड्रॉइंग (drawing)।
  2. साइट की सफ़ाई और मार्किंग।
  3. खुदाई और नींव (foundation), दीमक-रोधी उपचार (anti-termite treatment) समेत।
  4. प्लिंथ: प्लिंथ बीम (plinth beam), भराई और डैम्प-प्रूफ कोर्स (damp-proof course, DPC)।
  5. कॉलम (column), बीम और दीवारें।
  6. छत की स्लैब।
  7. सर्विस: बिजली और प्लंबिंग, प्लास्टर से पहले।
  8. प्लास्टर, और छत व गीली जगहों की वॉटरप्रूफिंग।
  9. फ़र्श, दरवाज़े और खिड़कियाँ।
  10. पेंट, फ़िनिशिंग और हैंडओवर।
  11. कम्प्लीशन और ऑक्यूपेंसी सर्टिफ़िकेट।

हर स्टेज पर क्या जाँचें?

स्टेजआगे बढ़ने से पहले जाँचेंऔर पढ़ें
1. नक्शा और मंज़ूरीपास हुआ नक्शा, स्ट्रक्चरल ड्रॉइंग, और मिट्टी की रिपोर्ट या आपके इंजीनियर की सलाह हाथ में हो। ठेकेदार से स्टेज के हिसाब से लिखित प्रोग्राम।मकान बनाने का सही समय, ज़मीन नापने की इकाइयाँ
2. मार्किंगज़मीन पर मार्क किया गया नक्शा ड्रॉइंग और प्लॉट की सीमा से मेल खाता हो, और कोने समकोण पर हों। प्लॉट का एरिया उसी इकाई में नापें जो आपके कागज़ों पर लिखी है।ज़मीन नापने की इकाइयाँ
3. खुदाई और नींवखाई का साइज़ और गहराई ड्रॉइंग से मेल खाते हों। मिट्टी वैसी ही हो जैसी रिपोर्ट में बताई गई थी। दीमक-रोधी उपचार नींव के कंक्रीट से पहले हो जाए। कंक्रीट डालने से पहले सरिया ड्रॉइंग के मुताबिक, कवर ब्लॉक के साथ लगा हो।फुटिंग का कंक्रीट (अंग्रेज़ी)
4. प्लिंथप्लिंथ बीम का साइज़ और सरिया ड्रॉइंग से मेल खाते हों। भराई अच्छी तरह दबाई गई हो। डैम्प-प्रूफ कोर्स स्पेसिफ़िकेशन के मुताबिक हो। फ़र्श का बेस डालने से पहले प्लिंथ की भराई पर दीमक-रोधी उपचार हो जाए।प्लिंथ बीम (अंग्रेज़ी)
5. कॉलम, बीम और दीवारेंहर ढलाई से पहले सरिया जाँचा जाए। कंक्रीट से क्यूब बनाए जाएँ। दीवारों की मोटाई और ईंट या ब्लॉक ड्रॉइंग के मुताबिक हों। मसाला तय अनुपात में हो।दीवार की मोटाई, मसाला, ईंट और ब्लॉक (अंग्रेज़ी)
6. छत की स्लैबशटरिंग मज़बूत और साफ़ हो। ढलाई से पहले सरिया और कवर जाँचे जाएँ। कंक्रीट तय ग्रेड का हो, ठीक से दबाया गया हो और उसकी क्योरिंग हो। शटरिंग तब तक लगी रहे जब तक आपका इंजीनियर लिखकर न कहे।स्लैब का मटीरियल, क्योरिंग (अंग्रेज़ी)
7. सर्विसपाइप और कंड्यूट तय जगहों पर हों और उनकी फ़ोटो ली गई हो। दीवारों पर प्लास्टर से पहले पानी के पाइप और नालियाँ टेस्ट हों, और इलेक्ट्रीशियन वायरिंग और अर्थिंग टेस्ट करके सर्टिफ़ाई करे।यही पेज
8. प्लास्टर और वॉटरप्रूफिंगप्लास्टर की क्योरिंग हो। छत पर ढलान और पानी निकलने के आउटलेट हों, और स्क्रीड डालने से पहले पॉन्डिंग टेस्ट पास हो।प्लास्टर की दरारें (अंग्रेज़ी), छत की वॉटरप्रूफिंग
9. फ़र्श, दरवाज़े, खिड़कियाँलेवल जाँचे जाएँ, टाइलें खोखली न हों, और चौखटें सीधी और साहुल में लगी हों।यही पेज
10. पेंट और हैंडओवरपेंट से पहले सतहें सूखी हों और दरारें भरी हों। सारे बिल, ड्रॉइंग और टेस्ट के रिकॉर्ड रखें।प्लास्टर की दरारें (अंग्रेज़ी)
11. सर्टिफ़िकेटआपके शहर में जो कम्प्लीशन या ऑक्यूपेंसी सर्टिफ़िकेट ज़रूरी है, उसके लिए आवेदन करें।यही पेज

काम शुरू करने से पहले क्या तैयार होना चाहिए?

काम शुरू होने से पहले नक्शा पास करवाएँ और आपके स्थानीय प्राधिकरण को जो मंज़ूरी चाहिए, वह ले लें। योग्य इंजीनियर से स्ट्रक्चरल ड्रॉइंग बनवाएँ, और नींव के लिए मिट्टी की रिपोर्ट या अपने इंजीनियर की सलाह लें। अपने ठेकेदार (contractor) से लिखित प्रोग्राम माँगें, जिसमें हर स्टेज और उसके पूरा होने की तारीख लिखी हो। सीमेंट जितना हो सके ताज़ा खरीदें और उसे ठीक से रखें, जैसा सीमेंट की शेल्फ़ लाइफ़ और स्टोरेज (अंग्रेज़ी) में बताया गया है।

नींव और प्लिंथ में क्या जाँचें?

  • खुदाई का साइज़ और गहराई ड्रॉइंग के मुताबिक हो। अगर मिट्टी रिपोर्ट में बताई गई मिट्टी से अलग दिखे, तो काम रोकें और अपने इंजीनियर को बताएँ।
  • दीमक-रोधी उपचार निर्माण से पहले किया जाने वाला केमिकल ट्रीटमेंट है, जो IS 6313 (Part 2) में दिया गया है। यह मानक इसे तब माँगता है जब खाइयाँ तैयार हों और नींव के कंक्रीट से पहले, और फिर फ़र्श का बेस डालने से पहले प्लिंथ की भराई पर। यह बारिश में या गीली मिट्टी पर नहीं किया जाता। ये समय मानक के पुराने संस्करण से लिए गए हैं, इसलिए अपने इंजीनियर से पूछें कि मौजूदा संस्करण से इन्हें मिलाकर देखें। उपचार करने वाले से तारीख, केमिकल और एरिया का लिखित रिकॉर्ड माँगें, और उसे फ़ाइल में रखें।
  • सरिया वैसे ही लगे जैसा ड्रॉइंग में दिखाया गया है, ढीली जंग और परत से साफ़ हो, और कवर ब्लॉक (cover block) से अपनी जगह पर टिका हो। IS 456 कहता है कि फुटिंग (footing) में कम से कम कवर 50 mm हो, और कवर ब्लॉक या स्पेसर हों जो सरिये को वहीं रखें जहाँ ड्रॉइंग में दिखाया गया है।
  • कंक्रीट डालने से पहले आपका इंजीनियर सरिया देखे। IS 456 कहता है कि ढलाई या शटरिंग खोलना शुरू करने से पहले सुपरवाइज़र को सूचना दी जाए, और सरिये और उसके लगाने की निगरानी को, उसके ढकने से पहले, “अत्यधिक महत्व का” बताता है।
  • प्लिंथ बीम ड्रॉइंग के मुताबिक ही रखें। देखें प्लिंथ बीम क्या है? (अंग्रेज़ी) प्लिंथ लेवल पर डैम्प-प्रूफ कोर्स वैसा हो जैसा आपका इंजीनियर बताए।

कुछ शहरों में प्लिंथ पूरा होने पर प्राधिकरण को बताना ज़रूरी है। दिल्ली में DDA के FAQ में बताया गया है कि प्लिंथ लेवल पर सूचना किसी लाइसेंस वाले प्रोफ़ेशनल के ज़रिए दी जाती है। अपने स्थानीय प्राधिकरण से पूछें।

कंक्रीट में क्या जाँचें?

कंक्रीट उसी ग्रेड का हो जो ड्रॉइंग पर लिखा है। IS 456 कहता है कि ढलाई के समय कंक्रीट से टेस्ट क्यूब बनाए जाएँ और 28 दिन पर टेस्ट किए जाएँ। काम में लगे कंक्रीट की मात्रा के हिसाब से यह 1 से 5 m³ के लिए एक सैंपल, 6 से 15 m³ के लिए दो सैंपल, 16 से 30 m³ के लिए तीन, 31 से 50 m³ के लिए चार, और हर अतिरिक्त 50 m³ या उसके हिस्से के लिए एक और सैंपल माँगता है। अपने इंजीनियर से यह इंतज़ाम करवाएँ, और नतीजे संभालकर रखें। कंक्रीट की क्योरिंग (curing, यानी पानी देकर पकाना) ज़रूरी है। कम से कम कितने दिन, यह कंक्रीट स्लैब की क्योरिंग कितने दिन करें? (अंग्रेज़ी) में दिया है। अपने इंजीनियर की लिखित मंज़ूरी के बिना शटरिंग (shuttering) न खुलने दें।

प्लास्टर से पहले क्या जाँचें?

प्लास्टर से पहले ईंट की दीवार में काटी गई नालियों (चेज़) में लगे स्लेटी बिजली के कंड्यूट और सफ़ेद पानी का पाइप
एआई से बना चित्र: प्लास्टर से पहले ईंट की दीवार में लगे कंड्यूट और एक पाइप।

दीवार पर प्लास्टर हो जाने के बाद उसके पीछे के पाइप और तार हमेशा के लिए छिप जाते हैं। प्लास्टर से पहले:

  • हर दीवार की फ़ोटो लें, जिसमें पाइप और कंड्यूट (conduit) दिख रहे हों, और नाप लिख लें। बाद में ड्रिल करते समय ये काम आएँगे।
  • अपने प्लंबर से कहें कि ढकने से पहले पानी के पाइप और नालियों में लीकेज का टेस्ट करे। टेस्ट का प्रेशर और तरीका आपका प्लंबर और इंजीनियर तय करें।
  • आपका इलेक्ट्रीशियन बिजली के मानकों के मुताबिक कंसील्ड कंड्यूट लगाता है और अर्थिंग (earthing) करता है, और उसे वायरिंग और अर्थिंग टेस्ट करके सर्टिफ़ाई करना चाहिए।
  • चेज़ (chase, यानी दीवार में काटी गई नाली) को साफ़-सुथरे ढंग से भरें, ताकि दरारें उनके साथ-साथ न चलें। देखें प्लास्टर में बारीक दरारें (अंग्रेज़ी)।

छत और गीली जगहों पर क्या जाँचें?

छत को ढकने से पहले उसमें ढलान, पानी निकलने के आउटलेट और पॉन्डिंग टेस्ट (ponding test) चाहिए। नंबर और तरीका छत की लीकेज और वॉटरप्रूफिंग में हैं। बाथरूम और दूसरी गीली जगहों के लिए अपने इंजीनियर से पूछें कि टाइल लगने से पहले उनकी वॉटरप्रूफिंग और टेस्ट कैसे होगा।

आख़िर में क्या होता है?

ज़्यादातर शहरों में घर में रहने जाने से पहले स्थानीय प्राधिकरण से कम्प्लीशन या ऑक्यूपेंसी सर्टिफ़िकेट (completion / occupancy certificate) लेना ज़रूरी है। इसका नाम, फ़ॉर्म और प्राधिकरण को लगने वाला समय, सब शहर के हिसाब से बदलते हैं। अपने स्थानीय प्राधिकरण से पूछें कि आप पर क्या लागू होता है। पास हुआ नक्शा, कम्प्लीशन सर्टिफ़िकेट, टेस्ट सर्टिफ़िकेट, दीमक-रोधी उपचार का रिकॉर्ड, और सारे बिल एक ही फ़ाइल में रखें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मकान बनाने में कितने स्टेज होते हैं?

नाम अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन क्रम हमेशा एक ही रहता है: मंज़ूरी, नींव, प्लिंथ, ढाँचा, दीवारें, छत, सर्विस, फ़िनिशिंग और सर्टिफ़िकेट।

हर स्टेज की जाँच कौन करे?

आपका इंजीनियर, उन मौकों पर जहाँ अगला स्टेज काम को ढक देगा, जैसे ढलाई से पहले और प्लास्टर से पहले। कुछ चीज़ें, जैसे मात्रा और सफ़ाई, आप खुद जाँच सकते हैं, लेकिन डिज़ाइन नहीं।

हर स्टेज में कितना समय लगता है?

यह मकान के साइज़, मौसम, मज़दूरों और सीमेंट व सरिये की सप्लाई पर निर्भर करता है। अपने ठेकेदार से लिखित प्रोग्राम माँगें और अपने इंजीनियर से पूछें कि वह व्यावहारिक है या नहीं।

क्या समय बचाने के लिए जाँच छोड़ सकते हैं?

नहीं। जो स्टेज अपना काम ढक देते हैं, उन्हीं की जाँच सबसे ज़्यादा ज़रूरी है। इन्हें छोड़ने से थोड़ा ही समय बचता है और नुकसान बहुत हो सकता है।

कौन-से कागज़ संभालकर रखें?

पास हुआ नक्शा, स्ट्रक्चरल ड्रॉइंग, टेस्ट सर्टिफ़िकेट, दीमक-रोधी उपचार का रिकॉर्ड, बिल, सर्विस की फ़ोटो और कम्प्लीशन सर्टिफ़िकेट।

संबंधित गाइड

यह गाइड सामान्य जानकारी है। डिस्क्लेमर (अंग्रेज़ी) पढ़ें। आपके घर के स्टेज और जाँच आपका इंजीनियर, आपकी ड्रॉइंग और आपका स्थानीय प्राधिकरण तय करते हैं।

स्रोत

यह केवल सामान्य जानकारी है। यह स्ट्रक्चरल डिज़ाइन या पेशेवर सलाह नहीं है। अपने नक्शे और साइट की जाँच किसी लाइसेंसधारी स्ट्रक्चरल इंजीनियर या आर्किटेक्ट से कराएँ।