संक्षिप्त उत्तर
छत की लीकेज कैसे रोकें? छत ज़्यादातर ढलान, आउटलेट, पैरापेट के जोड़ और दरारों से टपकती है, सिर्फ़ स्लैब से नहीं। छत को ढलान दें (डिज़ाइन लगभग 80 में 1 से 60 में 1, कभी 100 में 1 से ज़्यादा सपाट नहीं), वॉटरप्रूफिंग को पैरापेट पर लगभग 300 mm ऊपर तक ले जाएँ, जहाँ दरारें हिलती हैं वहाँ लचीली मेम्ब्रेन लगाएँ, और स्क्रीड से पहले 48 घंटे तक 50 mm पानी भरकर जाँचें। सिस्टम आपका इंजीनियर चुनता है।

इस पेज पर (12)
- छत से पानी क्यों टपकता है?
- छत में कितनी ढलान और कितने आउटलेट चाहिए?
- आउटलेट और पाइपों के बारे में क्या जानना चाहिए?
- ब्रिक बैट कोबा क्या है, और इसका वज़न कितना होता है?
- वॉटरप्रूफिंग दीवारों पर कितनी ऊँचाई तक जाए?
- वॉटरप्रूफिंग के कौन-से तरीके हैं, और कौन-सा कहाँ ठीक है?
- अगर दरारें हिलती रहें तो?
- पॉन्डिंग टेस्ट कैसे करें?
- छत को दोबारा लीक होने से कैसे बचाएँ?
- अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- संबंधित गाइड
- स्रोत
छत की लीकेज नीचे के कमरे की छत (ceiling, अंदर की तरफ़) पर सीलन के धब्बों और उखड़ते पेंट के रूप में दिखती है, आम तौर पर मरम्मत या नए निर्माण के बाद पहले मानसून में। ज़्यादातर लीकेज स्लैब के बीच से नहीं होती। वह उन जगहों से होती है जहाँ पानी जमा होता है या जहाँ दो सतहें मिलती हैं। यह पेज कारण, घर की छत के लिए ज़रूरी आँकड़े, मुख्य तरीके और ढकने से पहले नतीजे की जाँच का तरीका बताता है।
छत से पानी क्यों टपकता है?
- कम ढलान। जो पानी बह नहीं पाता, वह सतह पर खड़ा रहता है और हर कमज़ोर जगह ढूँढ लेता है।
- बंद या बहुत कम आउटलेट। पत्ते, गाद और प्लास्टर का मलबा आउटलेट को बंद कर देते हैं, और छत एक ट्रे की तरह भर जाती है।
- दीवार और पैरापेट के जोड़। स्लैब और दीवार का जोड़ वह जगह है जहाँ वॉटरप्रूफिंग सबसे ज़्यादा बार बहुत नीचे खत्म हो जाती है या बिना सील के छूट जाती है।
- दरारें। स्क्रीड या स्लैब की बारीक दरारें (hairline crack) पानी को अंदर जाने देती हैं, और जो दरारें गर्मी से खुलती-बंद होती हैं, वे सख्त कोटिंग को नाकाम कर देती हैं।
- स्लैब से गुज़रते पाइप। पाइपों और तारों के आसपास की खाली जगह छोटी होती है, लेकिन वह पानी का सीधा रास्ता है।
छत में कितनी ढलान और कितने आउटलेट चाहिए?
बिटुमेन फ़ेल्ट (bitumen felt) वाली वॉटरप्रूफिंग की सपाट छत के लिए IS 1346 कम से कम 100 में 1 की ढलान (slope) रखने को कहता है। यह न्यूनतम सीमा है, लक्ष्य नहीं। आम घर के लिए ढलान लगभग 80 में 1 से 60 में 1 रखें, ताकि थोड़ा बैठाव या असमान फ़िनिश ऐसा गड्ढा न छोड़े जहाँ पानी खड़ा रहे। बहुत बारिश वाले इलाकों में ज़्यादा ढलान आम है। पारंपरिक चूना कंक्रीट (lime concrete) की टेरेसिंग (IS 3036) 60 में 1 की ढलान में बिछाई जाती है, और भारी बारिश वाले इलाकों में 40 में 1 में।
आउटलेट के लिए चलन यह है कि छोटी छत पर बारिश के पानी का कम से कम एक आउटलेट (rainwater outlet) हो, और बड़ी छत पर, या जिस छत में कोई नीची जगह हो, उस पर दो। IS 3036 से आया एक पुराना अंगूठा नियम है: छत के हर 40 sq m के लिए लगभग एक 100 mm का आउटलेट, और भारी बारिश वाले इलाकों में इससे ज़्यादा चाहिए। पानी को आउटलेट तक जितनी दूरी तय करनी पड़े, उसे कम रखें। आपकी छत और आपके इलाके की बारिश के हिसाब से आउटलेट की संख्या और साइज़ आपका इंजीनियर तय करता है।
आउटलेट और पाइपों के बारे में क्या जानना चाहिए?
पक्का करें कि मेम्ब्रेन (membrane) आउटलेट के अंदर तक जाए, सिर्फ़ उसके किनारे तक नहीं, और हर पाइप के चारों ओर साफ़-सुथरा फ़िलेट (fillet, यानी कोने की गोलाई) हो। जाली या डोम (strainer, dome) लगाएँ ताकि पत्ते आउटलेट को बंद न करें, और हर आउटलेट साफ़ रखें। किसी पाइप की स्लीव या तार के लिए छोड़ी गई खाली जगह को बिना सील किए न छोड़ें।

ब्रिक बैट कोबा क्या है, और इसका वज़न कितना होता है?
ब्रिक बैट कोबा (brick bat coba) छत का पारंपरिक भारतीय ट्रीटमेंट है। ईंट के टूटे टुकड़ों को वॉटरप्रूफिंग कंपाउंड मिले सीमेंट के मसाले (mortar) में जमाया जाता है, स्लैब के ऊपर ढलान वाली परत में बिछाया जाता है, क्योरिंग (curing, यानी पानी देकर पकाना) के लिए पानी भरा जाता है, और फिर प्लास्टर की एक परत से फ़िनिश किया जाता है। सरकारी टेंडरों में दोहराए गए CPWD आइटम के अनुसार इसकी औसत मोटाई 120 mm, सबसे नीची जगह पर कम से कम 65 mm, और मसाला 1 भाग सीमेंट और 5 भाग रेत का होता है, जिसमें IS 2645 के अनुसार बना इंटीग्रल वॉटरप्रूफिंग कंपाउंड (integral waterproofing compound) मिला हो। इसका मुख्य काम ढलान बनाना है। यह असली वज़न बढ़ाता है, इसलिए आपके इंजीनियर को पक्का करना होगा कि स्लैब इसे उठा सकता है।
IS 875 (Part 1) के यूनिट वेट (unit weight) से इसके वज़न का उदाहरण:
- 18.8 kN/m³ (पकी मिट्टी की गिट्टी वाला चूना कंक्रीट) पर 120 mm की परत का वज़न 0.12 × 18.8 = 2.26 kN/m² है, यानी लगभग 230 kg प्रति sq m।
- 20.4 kN/m³ (सीमेंट का मसाला) पर 120 mm की परत का वज़न 0.12 × 20.4 = 2.45 kN/m² है, यानी लगभग 250 kg प्रति sq m।
इसलिए 120 mm के कोबा के लिए लगभग 2.3 से 2.5 kN/m² (230 से 250 kg प्रति sq m) मानें। यह गणना से निकाला गया अनुमान है। डिज़ाइन का घनत्व (density) आपका इंजीनियर चुनता है, और यह भी कि 120 mm में बेस और फ़िनिशिंग की परतें पहले से शामिल हैं या नहीं।
वॉटरप्रूफिंग दीवारों पर कितनी ऊँचाई तक जाए?
वॉटरप्रूफिंग को पैरापेट (parapet) और दीवारों पर लगभग 300 mm ऊपर तक ले जाएँ, और कम से कम 150 mm (IS 3067 में खाँचा छत से कम से कम 150 mm ऊपर होता है)। स्लैब और दीवार के जोड़ को फ़िलेट से गोल करें, ताकि मेम्ब्रेन किसी नुकीले कोने पर न मुड़े। 450 mm से ऊँची पैरापेट के लिए IS 3067 एक खाँचा (groove) बताता है, जो छत से कम से कम 150 mm ऊपर, 75 mm चौड़ा और 65 mm गहरा हो, और जिसमें ऊपर का किनारा दबाया जाता है। फ़ेल्ट वाली छतों में IS 1346 इस खाँचे को 1 : 4 सीमेंट के मसाले से भरता है। 450 mm या उससे कम ऊँची पैरापेट पर खाँचा काटने के बजाय ट्रीटमेंट को ऊपर से पार ले जाएँ। अपने इंजीनियर की मंज़ूरी के बिना किसी मौजूदा पतली दीवार में खाँचा न काटें।
वॉटरप्रूफिंग के कौन-से तरीके हैं, और कौन-सा कहाँ ठीक है?
| तरीका | कहाँ ठीक है | कहाँ ठीक नहीं | टिप्पणी |
|---|---|---|---|
| इंटीग्रल कंपाउंड के साथ ब्रिक बैट कोबा | मज़बूत, स्थिर स्लैब जिसमें कोई सक्रिय दरार नहीं | हिलती रहने वाली दरारें, एक्सपैंशन जॉइंट, ऐसे स्लैब जो यह वज़न नहीं उठा सकते | औसत 120 mm, कम से कम 65 mm; लगभग 2.3 से 2.5 kN/m² |
| चूना कंक्रीट की टेरेसिंग (IS 3036) | पारंपरिक या मरम्मत का काम | नया काम जिसमें आधुनिक वारंटी चाहिए | औसत कम से कम 100 mm और कहीं भी 50 mm |
| सीमेंट वाले स्लरी कोट और इंटीग्रल कंपाउंड | स्थिर स्लैब, बारीक दरारें जो हिलती नहीं | खुलने-बंद होने वाली दरारें, एक्सपैंशन जॉइंट | IS 2645 मज़बूती, जमने और पानी पार होने की जाँच करता है, क्रैक ब्रिजिंग की नहीं |
| बिटुमेन फ़ेल्ट (IS 1346) | अच्छी तरह तैयार बेस वाली सपाट RCC छतें | बिना सुरक्षा के ज़्यादा आना-जाना, लापरवाही से बने जोड़ | कम से कम ढलान 100 में 1 |
| APP या SBS मॉडिफ़ाइड बिटुमेन मेम्ब्रेन | ऐसी छतें जहाँ दरारें हिल सकती हैं, सुरक्षा वाले स्क्रीड के नीचे | गीले या ठीक से तैयार न किए गए बेस, बिना ट्रेनिंग वाले कारीगर | आम तौर पर 3 से 4 mm मोटी; टॉर्च से लगाई जाती है |
| लिक्विड एक्रिलिक या पॉलीयूरीथेन कोटिंग | छोटी हिलती दरारों और कई बारीक जगहों वाली छतें | खड़ा पानी, बिना सुरक्षा के ज़्यादा आना-जाना | एक सरकारी गाइडलाइन तीन कोट में लगभग 1 से 1.2 mm और 2 mm तक क्रैक ब्रिजिंग बताती है |
| PVC, TPO या HDPE शीट | ऐसी छतें जिनके हिलने की उम्मीद हो | खुद से किया जाने वाला काम, कई छेदों वाली बारीक जगहें | इस पेज के लिए कोई भारतीय मानक नहीं जाँचा गया, इसलिए सप्लायर से पूछें |
अगर दरारें हिलती रहें तो?
सीमेंट वाले कोट और इंटीग्रल कंपाउंड मज़बूत, स्थिर स्लैब पर काम करते हैं। जहाँ दरारें गर्मी से खुलती-बंद होती हैं, वहाँ वे फिर से फट सकते हैं, और आम तौर पर इसका जवाब लचीला सिस्टम होता है, जैसे मॉडिफ़ाइड बिटुमेन मेम्ब्रेन या लिक्विड इलास्टोमेरिक कोटिंग। यह इंजीनियरिंग की समझ की बात है, किसी कोड का क्लॉज़ नहीं। कोई भी तरीका अपनाने से पहले IS 3067 कहता है कि चौड़ी दरारों को V आकार में काटकर खोला जाए और भरा जाए, और एक्सपैंशन जॉइंट (expansion joint) में लचीला सीलेंट (sealant) चाहिए, कभी सख्त कोट नहीं। अपने इंजीनियर से पहले दरारों की जाँच करवाएँ।
पॉन्डिंग टेस्ट कैसे करें?
पॉन्डिंग टेस्ट (ponding test) दिखाता है कि ढकने से पहले वॉटरप्रूफिंग काम कर रही है या नहीं। एक सरकारी ड्राफ़्ट गाइडलाइन (CIDC) यह तरीका देती है, और यही सबसे ज़्यादा बताया जाता है:
- वॉटरप्रूफिंग की क्योरिंग उतने समय तक होने दें जितना बनाने वाली कंपनी कहती है। लिक्विड एक्रिलिक कोटिंग के लिए गाइडलाइन 7 दिन देती है।
- बारिश के पानी का हर आउटलेट बंद करें।
- छत में लगभग 50 mm गहराई तक पानी भरें।
- इसे 48 घंटे तक छोड़ दें।
- स्लैब के नीचे की तरफ़, यानी नीचे के कमरे की छत, पर कोई लीकेज या सीलन का धब्बा देखें। अगर कोई नहीं है, तो टेस्ट पास है।
- आउटलेट खोलकर पानी निकाल दें, और उसके बाद ही सुरक्षा वाला स्क्रीड (screed) या टाइल बिछाएँ।
पानी वज़न बढ़ाता है: 50 mm पानी लगभग 0.5 kN/m² होता है, यानी लगभग 50 kg प्रति sq m, इसलिए बहुत बड़े या हल्के डिज़ाइन वाले स्लैब पर पानी भरने से पहले अपने इंजीनियर से पूछें। छत की वॉटरप्रूफिंग के भारतीय मानक, IS 1346 और IS 3067, पॉन्डिंग टेस्ट तय नहीं करते। ब्रिक बैट कोबा के लिए CPWD आइटम दो हफ़्ते तक पानी भरकर रखने का तरीका इस्तेमाल करता है, जो क्योरिंग और टेस्ट दोनों का काम करता है।

छत को दोबारा लीक होने से कैसे बचाएँ?
हर मानसून से पहले आउटलेट और पैरापेट की नालियाँ साफ़ करें, जोड़ों और दरारों को देखें, और बारिश से पहले छोटी दरारें ठीक करवाएँ। छत में पौधों या पेड़ों की जड़ें न जमने दें, और ऐसा भारी सामान न रखें जो मेम्ब्रेन या स्क्रीड को नुकसान पहुँचा सके।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या ब्रिक बैट कोबा वॉटरप्रूफिंग है?
यह वॉटरप्रूफिंग कंपाउंड वाला सीमेंट आधारित सिस्टम है, जो ढलान भी बनाता है। इसका इस्तेमाल मज़बूत, स्थिर स्लैब पर होता है। जहाँ दरारें हिलती हैं, वहाँ आम तौर पर लचीली मेम्ब्रेन चुनी जाती है।
पॉन्डिंग टेस्ट कितनी देर चलना चाहिए?
आउटलेट बंद करके, लगभग 50 mm पानी के साथ 48 घंटे, सुरक्षा वाला स्क्रीड बिछाने से पहले।
छत में कितनी ढलान चाहिए?
फ़ेल्ट वाली वॉटरप्रूफिंग के लिए न्यूनतम कम से कम 100 में 1, और आम घर के लिए अच्छा डिज़ाइन लगभग 80 में 1 से 60 में 1।
पैरापेट पर वॉटरप्रूफिंग कितनी ऊँची जाए?
लगभग 300 mm, और तैयार छत के लेवल से 150 mm से कम नहीं।
ब्रिक बैट कोबा की परत का वज़न कितना होता है?
120 mm के लिए लगभग 2.3 से 2.5 kN/m² (230 से 250 kg प्रति sq m)।
क्या पुरानी छत पर नई वॉटरप्रूफिंग कर सकते हैं?
यह पुरानी परत, स्लैब और दरारों की हालत पर निर्भर करता है। अपने इंजीनियर से पहले इसकी जाँच करवाएँ।
संबंधित गाइड
- प्लास्टर में बारीक दरारें: कारण और क्या करें (अंग्रेज़ी)
- दिल्ली में घर बनाने का सबसे अच्छा समय: मानसून या सर्दी?
- कंक्रीट स्लैब की क्योरिंग कितने दिन करें? (अंग्रेज़ी)
यह गाइड सामान्य जानकारी है। डिस्क्लेमर (अंग्रेज़ी) पढ़ें। आपकी छत का वॉटरप्रूफिंग सिस्टम, उसकी ढलान, आउटलेट और टेस्ट आपका इंजीनियर और प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनी के निर्देश तय करते हैं।
स्रोत
- IS 1346:1991, Code of Practice for Waterproofing of Roofs with Bitumen Felts
- IS 3067:1988, Code of Practice for General Design Details and Preparatory Work for Damp-Proofing and Water-Proofing of Buildings
- IS 3036:1992, Code of Practice for Laying Lime Concrete for a Waterproofed Roof Finish
- IS 2645:2003, Integral Waterproofing Compounds for Cement Mortar and Concrete - Specification
- IS 875 (Part 1):1987, Code of Practice for Design Loads (Other than Earthquake) for Buildings and Structures: Dead Loads
- CPWD Delhi Schedule of Rates item 22.7.1, brick bat coba waterproofing treatment, as reproduced in government tender documents
- CIDC, Draft National Bidding Documents, Vol. 4 Technical Specifications (waterproofing guidelines for new construction)
यह केवल सामान्य जानकारी है। यह स्ट्रक्चरल डिज़ाइन या पेशेवर सलाह नहीं है। अपने नक्शे और साइट की जाँच किसी लाइसेंसधारी स्ट्रक्चरल इंजीनियर या आर्किटेक्ट से कराएँ।
